संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर दूसरे दिन भी तीखी बहस देखने को मिली। इसी दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए सरकार की मंशा और इसके संभावित प्रभावों पर सवाल खड़े किए।
‘परिसीमन के जरिए असफल राज्यों को मिल रहा राजनीतिक लाभ’
लोकसभा में चर्चा के दौरान शशि थरूर ने कहा कि परिसीमन की मौजूदा प्रक्रिया उन राज्यों को राजनीतिक रूप से लाभ दे सकती है जो जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से देश के संघीय संतुलन पर असर पड़ सकता है और यह मुद्दा केवल संख्या का नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के संतुलन का भी है।
‘महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं’
थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह एक अलग विषय है और इसे स्वतंत्र रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे विषय पर और गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
‘राजनीतिक विमुद्रीकरण जैसी जल्दबाजी’, सरकार पर तीखा हमला
कांग्रेस सांसद ने सरकार की तुलना नोटबंदी के फैसले से करते हुए कहा कि जिस तरह उस समय जल्दबाजी दिखाई गई थी, उसी तरह परिसीमन में भी तेजी दिखाई जा रही है। उन्होंने इसे “राजनीतिक विमुद्रीकरण” जैसा कदम बताया और कहा कि महिला आरक्षण को इस प्रक्रिया के कारण अनिश्चितता में डाल दिया गया है।
परिसीमन और लोकसभा संरचना पर उठाए सवाल
थरूर ने गृह मंत्री अमित शाह के 50 प्रतिशत फॉर्मूले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह कोई विधायी आश्वासन नहीं बल्कि राजनीतिक बयान प्रतीत होता है। उन्होंने लोकसभा की संभावित सीट संख्या 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता जताई और कहा कि इससे सदन के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा का आकार बढ़ाने की बात हो रही है, लेकिन राज्यसभा के विस्तार पर कोई चर्चा नहीं है, जिससे दोनों सदनों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है।
तीन प्रमुख चिंताओं पर जताई आपत्ति
शशि थरूर ने परिसीमन को लेकर तीन मुख्य चिंताएं सामने रखीं। उनके अनुसार, इससे छोटे और बड़े राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है, उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व में अंतर बढ़ सकता है और आर्थिक रूप से मजबूत तथा कमजोर राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है।
महिला आरक्षण का समर्थन, परिसीमन पर सतर्कता की मांग
थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए और इसे व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
कनिमोझी का भी सरकार पर निशाना
इस बहस के दौरान डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब संसद में इस मुद्दे पर चर्चा जारी थी, उसी समय महिला आरक्षण कानून को अधिसूचित कर देना यह दर्शाता है कि सरकार संसदीय प्रक्रिया और चर्चा को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है।
